विश्व पर्यावरण दिवस पर बीएचयू में हुआ व्यापक पौधारोपण कार्यक्रम, पर्यावरण संरक्षण का लिया गया संकल्प

वाराणसी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कृषि विज्ञान संस्थान में एक विशेष पौधारोपण एवं पर्यावरण जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और हरित वातावरण को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षकों, छात्रों, अधिकारियों और विभिन्न विभागों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे परिसर में सकारात्मक माहौल देखने को मिला और उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए पौधों की देखभाल का संकल्प भी लिया।

विश्वभर में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटते हरित क्षेत्र आज एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ऐसे समय में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित ये कार्यक्रम सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों के भीतर पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना भी था। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिनमें छायादार, फलदार और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक पौधों को प्राथमिकता दी गई। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि पौधारोपण तभी सफल माना जाएगा जब लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल भी की जाए। इसी सोच के साथ सभी प्रतिभागियों ने पौधों को सुरक्षित रखने और उनकी देखरेख करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जॉइंट पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण और बदलता पर्यावरणीय संतुलन पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में पौधारोपण जैसे प्रयास बेहद जरूरी हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और अधिक से अधिक लोगों को इसके प्रति जागरूक करें। उनके विचारों को उपस्थित छात्रों और शिक्षकों ने ध्यानपूर्वक सुना और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का प्रयास किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. यू.पी. सिंह ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कृषि और पर्यावरण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो कृषि भी बेहतर होगी और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि पौधे केवल ऑक्सीजन देने का काम नहीं करते, बल्कि मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता और जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे सिर्फ एक दिन पौधारोपण तक सीमित न रहें, बल्कि पूरे वर्ष पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उनके अनुसार छोटे-छोटे प्रयास भी मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं और समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचा सकते हैं।

कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद और गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। इनमें डॉ. अरुण सिंह, रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित नंदन धर द्विवेदी, प्रोफेसर अमित त्यागी, वरिष्ठ छात्रनेता डॉ. एस.के. अग्रवाल तथा प्रवीण योगी प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल विकास की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि टिकाऊ विकास की दिशा में काम करना जरूरी है। यदि पर्यावरण सुरक्षित नहीं रहेगा तो विकास का लाभ भी लंबे समय तक नहीं मिल पाएगा। वक्ताओं ने छात्रों से अपील की कि वे अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाएं और लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पौधारोपण किया और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा में हिस्सा लिया। छात्रों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम उन्हें प्रकृति के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का एहसास कराते हैं। कई छात्रों ने कहा कि वे अपने घरों, मोहल्लों और गांवों में भी पौधे लगाने का अभियान चलाने का प्रयास करेंगे। इस दौरान शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं के बारे में जानकारी दी और बताया कि छोटे स्तर पर किए गए प्रयास भी बड़े बदलाव का कारण बन सकते हैं।

मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के बदलते स्वरूप पर क्या सोचते हैं स्थानीय लोग? परंपरा और विकास के बीच चल रही नई बहस

पौधारोपण अभियान के दौरान संस्थान परिसर के विभिन्न हिस्सों में पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने पौधों को नियमित रूप से पानी देने, उनकी सुरक्षा करने और उन्हें विकसित करने का संकल्प लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि पौधारोपण तभी प्रभावी होता है जब लगाए गए पौधे लंबे समय तक जीवित रहें। इसी उद्देश्य से पौधों की निगरानी और देखभाल पर भी विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि केवल एक दिन पौधे लगाकर फोटो खिंचवाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी देखरेख करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने एक सकारात्मक संदेश देने का काम किया। पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने और लोगों को प्रकृति से जोड़ने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित ये पहल न केवल विश्वविद्यालय परिसर बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने आशा व्यक्त की कि इस तरह के प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे और अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण के मिशन से जुड़ेंगे।

पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। बढ़ते प्रदूषण, घटते जंगल और बदलती जलवायु परिस्थितियां लगातार चेतावनी दे रही हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम समाज को सही दिशा देने का काम करते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर ये संदेश दिया कि प्रकृति की सुरक्षा हम सभी की साझा जिम्मेदारी है और इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top