वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बुधवार को उस समय हलचल बढ़ गई, जब चीन से नेपाल की राजधानी काठमांडू जा रही दो अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों को खराब मौसम के कारण वाराणसी एयरपोर्ट पर डायवर्ट करना पड़ा। एयर ट्रैफिक कंट्रोल की निगरानी में दोनों विमानों की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। कुछ समय तक एयरपोर्ट पर रुकने के बाद, जैसे ही काठमांडू में मौसम की स्थिति सामान्य हुई, दोनों उड़ानों को उनके निर्धारित गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, नेपाल की राजधानी काठमांडू में मौसम अचानक खराब हो गया था। बादलों की घनी परत, कम विजिबिलिटी और अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण विमानों की सुरक्षित लैंडिंग चुनौतीपूर्ण हो गई थी। ऐसे में यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संबंधित एयरलाइंस और एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने विमानों को नजदीकी वैकल्पिक एयरपोर्ट की ओर मोड़ने का फैसला लिया। वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इस स्थिति में सबसे उपयुक्त विकल्प साबित हुआ।
एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक, चीन से नेपाल जा रही एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट को सबसे पहले वाराणसी की ओर डायवर्ट किया गया। इसके कुछ समय बाद हिमालय एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या एच-7363 को भी काठमांडू में प्रतिकूल मौसम के कारण वाराणसी एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया। दोनों विमानों ने निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए एयरपोर्ट पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की। एयरपोर्ट प्रशासन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और ग्राउंड स्टाफ पहले से सतर्क थे, जिसके चलते पूरी प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के पूरी हुई।
एयरपोर्ट पर विमानों के उतरने के बाद यात्रियों को विमान के भीतर ही आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। कुछ यात्रियों ने स्थिति को लेकर जानकारी ली, जबकि एयरलाइन स्टाफ लगातार मौसम की स्थिति और आगे की यात्रा के बारे में अपडेट देता रहा। चूंकि डायवर्जन पूरी तरह सुरक्षा कारणों से किया गया था, इसलिए अधिकांश यात्रियों ने इसे सामान्य प्रक्रिया के रूप में स्वीकार किया। विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि खराब मौसम के दौरान इस तरह का फैसला लेना पूरी तरह सुरक्षा मानकों का हिस्सा होता है और इससे किसी भी संभावित जोखिम को कम किया जा सकता है।
वाराणसी एयरपोर्ट उत्तर भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में से एक माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में यहां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। यही वजह है कि जब आसपास के किसी क्षेत्र में मौसम या अन्य तकनीकी कारणों से उड़ानों को वैकल्पिक स्थान की जरूरत पड़ती है, तब वाराणसी एयरपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एयरपोर्ट का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, रनवे क्षमता और प्रशिक्षित स्टाफ ऐसी परिस्थितियों को संभालने में सक्षम माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून और बदलते मौसम के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित एयरपोर्ट्स पर मौसम अचानक बदल सकता है। नेपाल की राजधानी काठमांडू भी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जहां कई बार कुछ ही मिनटों में मौसम का स्वरूप बदल जाता है। ऐसी स्थिति में पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल लगातार मौसम की निगरानी करते हैं और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया जाता है। ये प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा नियमों के तहत पूरी की जाती है।
बुधवार को हुई इस घटना के दौरान भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। मौसम खराब होने के कारण सीधे काठमांडू में लैंडिंग का प्रयास करने के बजाय विमानों को सुरक्षित एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया। इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी और किसी भी प्रकार के जोखिम से बचाव हुआ। कुछ समय बाद जब मौसम की स्थिति में सुधार हुआ और काठमांडू एयरपोर्ट पर संचालन सामान्य हुआ, तब दोनों विमानों को आगे की यात्रा के लिए अनुमति दे दी गई।
एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, डायवर्ट की गई उड़ानों के संचालन के दौरान वाराणसी एयरपोर्ट की नियमित सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। अन्य निर्धारित उड़ानें भी अपने तय समय के अनुसार संचालित होती रहीं। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने अतिरिक्त समन्वय के साथ सभी गतिविधियों को सुचारू रूप से संभाला। यही वजह रही कि यात्रियों को किसी बड़ी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
विमानन क्षेत्र में डायवर्जन कोई असामान्य घटना नहीं मानी जाती। जब भी किसी एयरपोर्ट पर मौसम, तकनीकी समस्या या अन्य सुरक्षा संबंधी कारण उत्पन्न होते हैं, तब उड़ानों को नजदीकी सुरक्षित एयरपोर्ट पर उतारा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों, क्रू और विमान की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। बुधवार को वाराणसी एयरपोर्ट पर हुई ये घटना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा रही।
फिलहाल दोनों अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य के लिए रवाना हो चुकी हैं और एयरपोर्ट संचालन सामान्य बना हुआ है। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि आपात परिस्थितियों में वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विमानन नेटवर्क में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एयरलाइंस, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और एयरपोर्ट प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय ने पूरे घटनाक्रम को सफलतापूर्वक संभाल लिया।